खुदा महफूज़ रखे इन्हें हर बला से,हर बला से
यह पोस्ट मैंने 'हमज़बान' के लिए लिखी थी या यह कहना सही होगा कि शहरोज़ भाई ने ...मुझसे लिखवा ली थी.उनके जैसे तकाज़े करने वाला और मेरे जैसे टालने वाला.उन्हें ऑनलाईन देखकर ही डर जाती कि अभी पूछ बैठेंगे और जरा सी कुशल क्षेम के बाद वे पूछ ही लेते कभी कभी तो...
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rashmi ravija
mumbai
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[03 Feb 2010 10:15 AM]



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