मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम--------(मिथिलेश दुबे)
मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,कविता में पिरे शब्दों की व्यजंना हो तुम,मर्म-स्पर्शी नव साहित्य की सृजना हो तुम,नव प्रभा की पथ प्रदर्शक लालिमा हो तुम,मेरे कोरे दिल की कल्पना हो तुम,स्वप्न दर्शी शुप्त आखों मेंबसी तलाश हो तुम,सावन की कजरी में घुली मिठास हो...
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Mithilesh dubey
कविता
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[03 Feb 2010 09:02 AM]



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