विडम्बना

गीत............... अक्सर -सुबह सड़क परनन्हें बच्चों को देखती हूँ ,कुछ सजे - संवरे बस्ता उठायेबस के इंतज़ार मेंमाँ का हाथ थामे हुएस्कूल जाने के लिए उत्साहित से , प्यारे से ,लगता है देश का भविष्य बनने को आतुर हैं ।और कुछ नन्हे बच्चे नंगे पैर , नंगे बदनआंखों में मायूसी लिएचहरे... [पूरी पोस्ट]
writer sangeeta swarup
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[03 Feb 2010 08:58 AM]

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