दुनिया आनी-जानी है
दुनिया आनी-जानी है चिपके तो नादानी है सारे पंडित ज्ञानी है इक तू ही अज्ञानी है कबीरा क्या समझाएगा यह दुनिया दीवानी है अमृत ज़हर ज़हर अमृत मीरा तो मस्तानी है हर चेहरे पर आँखें दो आँखें हैं तो पानी है कभी छाछ से काम चला रोज कहाँ गुड-धानी है इसकी उसकी बात अलग...
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jogeshwar garg
ghazal
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[03 Feb 2010 07:35 AM]



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