बीमा की महिमा

साहित्य सर्जक बड़ी मधुर २ आवाज में कुछ आने लगे मुझ जैसे नाचीज को भी सर कह कर बुलाने लगे फिर बीमा करवाने के बिना पूछे ही फायदे बताने लगे बहुतेरा मना किया मैं झुंझलाया झल्लाया पर उनपर इस का कोई फर्क नही पाया वह मेरे घर में आतंवादी सा घुस आया मैं घबरा गया उस ने मुझे नही... [पूरी पोस्ट]
writer vedvyathit
views
16
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[03 Feb 2010 06:54 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix