सूख गया गुलाब…अब और भी महकता है

चौराहा तमाम गीत चुनकर मैंने रख लिए हैं/ उस गुलदस्ते में / जिसमें पहली-पहली बार / तुम्हारे जूड़े से निकालकर / लगा लिया था / लाल गुलाब / अब वो सूख गया है / पर महक़ अब तक है / वैसी की वैसी / जैसी थी नए-नकोर फूल में / और देखो / महकता ही जा रहा है / बिना मिलन के... [पूरी पोस्ट]
writer चण्डीदत्त शुक्ल

कह रहा हूं तुमसे

views
24
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
9
[03 Feb 2010 05:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix