सूख गया गुलाब…अब और भी महकता है
तमाम गीत चुनकर मैंने रख लिए हैं/ उस गुलदस्ते में / जिसमें पहली-पहली बार / तुम्हारे जूड़े से निकालकर / लगा लिया था / लाल गुलाब / अब वो सूख गया है / पर महक़ अब तक है / वैसी की वैसी / जैसी थी नए-नकोर फूल में / और देखो / महकता ही जा रहा है / बिना मिलन के...
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चण्डीदत्त शुक्ल
कह रहा हूं तुमसे
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[03 Feb 2010 05:30 AM]



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