एक तुम हो जो निश्चिंत हो दुनिया के भीड़ में गुम

Arshad ke man se........ कल माँ की अचानक तबियत ख़राब होने के कारण उन्हें हॉस्पिटल में भारती करना पड़ा..कल दिन भर एक मायूसी छाई रही... कई बार सोंचा चिंता न करूँ सब ठीक हो जायेगा मगर चिंताएं दस्तक कहा देती धडधडाते हुए मन मस्तिस्क पर छाती रही...ऐसे तो मै चार भाई बहनों में तीसरे... [पूरी पोस्ट]
writer Arshad Ali
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[03 Feb 2010 03:23 AM]

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