कौटिल्य दर्शन बुद्धि और उद्यम के संयुक्त प्रयास से फल की प्राप्ति
धातोश्चामीकरमिव सर्पिनिर्मथनादिव।बुद्धिप्रयत्नोपगताध्यवसायाद्ध्रवं फलम्।।हिन्दी में भावार्थ-जिस तरह अनेक धातुओं में मिला होने पर भी गलाने से प्रकट होता है तथा दही मथने से घृत प्रगट होता है वैसे बुद्धि और उद्योग से के संयुक्त उद्यम से फल की प्राप्ति भी...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[02 Feb 2010 19:57 PM]



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