चलो, चुप हो जाऍं

अनौपचारिक चलो,चुप हो जाऍं, कुछ दिनों के लिएजैसे,चुप हो जाते हैं दो अनन्‍य मित्रसहनशीलता की आखिरी सीमाआने से पहले ,बिना एक-दूसरे को नुकसान पहुँचाएकरते रहते हैं, अपना कामसाझे मिशन के लिएसदाशयता से ,कभी मिल जाने के लिएजैसे,मॉं-बाप पूरे करते रहते हैं अपना... [पूरी पोस्ट]
writer अर्कजेश

कविता

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[02 Feb 2010 17:44 PM]

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