तुम जब याद आते हो

मोहन का मन तुम जब याद आते हो तो रुलाते हो जब याद नहीं आतेतो सताते हो आखिर क्यूँक्या यही होती है चाहतक्या यही प्रेम कहलाता हैअगर है यही प्रेमतो है कडवा मगर बड़ा प्याराखुसनसीब हैं वों जो पीते हैं इस प्याले कोहो जाते हैं अमर कर जाते हैं अमर जो पीते हैं इस प्याले को... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ 9988097449
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[02 Feb 2010 14:02 PM]

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