दफ्तर की एक शाम
दफ्तर में सीढ़ियां चढ़कर जैसे ही न्यूज़ रूम में कदम रखा, तो निशांत बिसेन और मनीष शांडिल्य पर नज़र पड़ी। मैं दुआ-सलाम कर पाता इससे पहले ही निशांत बोल पड़ें राजीव चलो नीचे से आते हैं। दौड़ती हुई मेरी नज़र घड़ी पर गई, उस वक्त 3 बजने में 10 मिनट देर थी......
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राजीव कुमार
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[02 Feb 2010 13:37 PM]



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