क्यों सताते हो...?

जज़्बात-दिल से तुम्हारे सामने आते हीदिल कि बातजुबां तक आकररुक जाती है,तुम्हे देखने के लिएझुकी नज़रउठती है तोसारे राज़ कह जाती हैसब जानकर भी तुम,फिर अनजान सेबन जाते होकह दो न...आखिर,क्यों सताते हो...?... [पूरी पोस्ट]
writer अखिलेश सोनी

कविता

views
30
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
5
[02 Feb 2010 10:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix