क्यों सताते हो...?
तुम्हारे सामने आते हीदिल कि बातजुबां तक आकररुक जाती है,तुम्हे देखने के लिएझुकी नज़रउठती है तोसारे राज़ कह जाती हैसब जानकर भी तुम,फिर अनजान सेबन जाते होकह दो न...आखिर,क्यों सताते हो...?...
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अखिलेश सोनी
कविता
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[02 Feb 2010 10:57 AM]



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