तुम्हारे लिए....
मालूम नहीं....कब तक...मैं यूंही लिखती रहूंगी.....इन बेहिसाब शब्दों के साथ...अपने सपने बांटती रहूंगी...अब तुमसे ज्यादा....ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....इसीलिए..शायद...मेरी बात...तुम तक..पहुंचाते हैं......कल की ही तरह...मैं आज भी लिखती हूं...तुम्हारे...
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tanu sharma.joshi
तुम....
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[02 Feb 2010 12:54 PM]



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