सौदागर और ढिंढोरची-हिन्दी व्यंग्य कविता (market and media-hindi comic poem)
चौराहे पर चार लोग आकरचिल्लाते जूता लहरायेंगे,चार लोग नाचते हुएशांति के लिये सफेद झंडा फहरायेंगे।चार लोग आकर दर्द केचार लोग खुशी के गीत गायेंगे।कुछ लोगों को मिलता है भीड़ को भेड़ों की तरह चराने की ठेकावह इंसानो को भ्रम के दरिया में बहायेंगे।सोच सकते हैं जो...
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दीपक भारतदीप
sher
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[02 Feb 2010 11:50 AM]



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