राम रसोई हुई मुखर…|

satyarthmitra बुरा हो इस ब्लॉगजगत का जो चैन से आलस्य भी नहीं करने देता। एक स्वघोषित आलसी महाराज तुरत-फुरत कविता रचने और ठेलने की फैक्ट्री लगा रखे हैं। इधर-उधर झाँकते हुए टिपियाते रह्ते हैं। रहस्यमय प्रश्न उछालते हैं और वहीं से कोई सूत्र निकालकर कविता का एक नया प्रयोग... [पूरी पोस्ट]
writer सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी

कविता

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[02 Feb 2010 10:05 AM]

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