आज का सच
आज का जन्मपैदा होते हीमाँ के सीने से लिपटापर उसके दूध से दूरबोतल और बाल आहार पर पलताखोल के नन्ही आंखेंबिटर-बिटर दुनिया को तकताबनूँगा इस आहार पर हीताकतवरहगीज़ पहन कर भीख़ूब है हँसताआज का बचपनडगमगाते कदमो सेसूरज के संग खोल के आंखेंहाथ थाम के चलने की...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[02 Feb 2010 08:52 AM]



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