इब्नबतूता का जूता
-सर्वेश्वर दयाल सक्सेनाइब्नबतूता पहन के जूतानिकल पड़े तूफान मेंथोड़ी हवा नाक में घुस गईघुस गई थोड़ी कान मेंकभी नाक को, कभी कान कोमलते इब्नबतूताइसी बीच में निकल पड़ाउनके पैरों का जूताउड़ते उड़ते जूता उनकाजा पहुँचा जापान मेंइब्नबतूता खड़े रह गयेमोची की...
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समकालीन जनमत
कविता
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[02 Feb 2010 07:41 AM]



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