अब दर्द नहीं जाता
कितना भी मुस्कुरा लें, अब दर्द नहीं जाता,अक्सर रात को तन्हा चाँद,मुझको तन्हा कर जाता।चंद बादलों से मिलकर, अब भी रो देता है आसमां,सच है अपनों के मरहम से, इक दर्द नहीं जाता।जब भी जाना है सहरा को ,वो खूबसूरत ही लगता है,जब तक कोई काफिला, कहीं भटक नहीं...
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Navnit Nirav
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[02 Feb 2010 07:00 AM]



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