निकोलस गियेन की कविता : एक सर्द सुबह
सोचता हूं उस सर्द सुबह को कि जिसमें गया था मिलने तुम्हें,वहां जहां हवाना जाना चाहता है खेतों की खोज में,वहां तुम्हारे रौशन उपांत में।मैं अपनी रम की बोतलऔर अपनी जर्मन कविताओं की किताब के साथ,जो आखिरकार तुम्हें दे आया था तोहफे में।(या फिर रख लिया था तुमने...
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चन्दन
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[02 Feb 2010 06:02 AM]



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