बीती विभावरी जाग री.....

If  tired, rest here बीती विभावरी जाग रीअम्बर पनघट में डुबो रहीतारा घट उषा नागरीखग कुल कुल सा बोल रहाकिसलय का अंचल दोल रहालो लतिका भी भर लायी मधु मुकुल नवल रस गागरीअधरों में राग अमंद पिए अलकों में मलयज बंद कियेतू अब तक सोयी है आलीआँखों में लिए विहाग री--- जय शंकर प्रसाद... [पूरी पोस्ट]
writer Kali Hawa
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[02 Feb 2010 04:10 AM]

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