गुज़रे वक़्त की बातें

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. वक़्त कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता। ऐसा लगता है कि हम जैसे किसी पुल की तरह खड़े रहते हैं और वक़्त गाड़ियों की तरह निरंतर गुज़रता रहता है। जब द्विज जी से मिला था कालेज में उस वक़्त मेरी उम्र १८-१९ साल की थी और मैं पंजाबी में कविता लिखता था और शिव कुमार... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल
views
17
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
12
[02 Feb 2010 03:35 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix