माँ, सॉफ्टी, अपने और ''मामा जी'' का बचपन
माँमाँ की ऑचल से प्यार बरसता है,ममता बिन जीवन अधूरा लगता है।जब उनके हाथो की रोटी मिलती है,तो सारे संसार का ''वैभव'' छोटा लगता है।।सॉफ्टीतेरे सॉफ्टी को देख कर,मुझे भी खाने का मन कर रहा है।उफ ये क्या तू वहाँ हाफ टी-शर्ट मे,और मै यहाँ स्वेटर मे घूम रहा...
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महाशक्ति
काव्य
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[01 Feb 2010 23:08 PM]



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