वो कातिल अदायें लिये घूमते हैं, भला अपनी मंजिल कोई कैसे पाए । आज तरही मुशायरे का समापन श्री तिलकराज कपूर जी और निर्मला कपिला जी की रचनाओं के साथ ।

सुबीर संवाद सेवा म प्र वैसे सोचा तो ये था कि इस बार के तरही को क्‍योंकि ये नये साल का है इसलिये जनवरी में ही समापन कर देंगें । लेकिन अपना सोचा कब होता है वो जब सोचे तब होता है । और बहुत प्रयास करने के बाद भी फरवरी में मुशायरा प्रवेश कर गया है । और आज इसका समापन होना है । समापन... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[01 Feb 2010 21:47 PM]

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