संवाद का सफर
दोस्तों, पहाड़ सी जिंदगी, धूप-छांव सा मंजर,उतरती-चढ़ती डगर पर मेरे संवाद का सफर, बहुत से कहे-अनकहे किस्से-कहानियों का स्मृति वन है। इस वन का मैं ही माली हूं और मैं ही मालिक। मुझ से ही यहां विचारों की पौध पल्लवित होती है और भावनाओं के पुष्प खिलते हैं।...
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संतोष गुप्ता
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[10 Jan 2010 10:59 AM]



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