खर्च का दुगना पाया सुख-3
पत्रिका समूह की सालाना समीक्षा बैठक में पहुंचने का आमंत्रण मिलने के दिन से ही यह सवाल दिमाग में कौंधने लगा कि भीलवाड़ा से कब निकला जाएगा? पुराना अनुभव है रातभर कामकर या सफर कर कॉन्फ्रें स में पहुंचते हैं तो फिर पूरे दिन नींद और आलस में बीत जाता है।...
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संतोष गुप्ता
लम्हे जो याद बन गए...
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[25 Dec 2009 05:20 AM]



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