शहर से प्रेम दर्शाओ

संवाद का सफर सन्तोष गुप्ताचुनाव प्रचार का शोर-शराबा थम गया है। भौंपुओं का मुंह बंद हो गया है। सभाओं की जोड़-तोड़ घट गई है। रैलियों की दौड़-धूप मिट गई है। कार्यकर्ताओं का रूठना-मनना लगभग खत्म सा हो गया है। दोस्त-दुश्मनों में मान-मनौव्वल का दौर भी पट गया है। मनाने वाले... [पूरी पोस्ट]
writer संतोष गुप्ता
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[26 Dec 2009 05:24 AM]

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