आँखें

काव्य तरंग हर पल हर घड़ी रहे , तांकती आँखें ।आँखों से ही दिलो में , झांकती आँखें ।।अनगिनत रंग-रंगीले, इनमे सपने बसे है ।बिन बोले बाते हो जाने की , ये ही वजह है ।।सागर से भी ज्यादा है, गहराई इनमे ।ना जाने कितनी छुपी हुई, तनहाई इनमे ।।दुःख गहरा हो मन में, तो भर आती... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

रानीविशाल द्वारा रचित

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[01 Feb 2010 19:29 PM]

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