बाट तेरी जोहती हूँ

मानसी  आज भी मैं बाट तेरी जोहती हूँरात जब तू खो गया था आँख से चुपचाप बह करझर गया था एक अश्रुमन का आर्तनाद बन करपथ अभी भीगा हुआ हैनहीं बुहारा मैंने आँगनराह अब भी देखती हूँबाट तेरी जोहती हूँमाना ये जीवन है सुंदरहर इक क्षण है बहुत प्याराछोटी-छोटी खुशियों से... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी

poetry

views
26
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
4
[01 Feb 2010 18:39 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix