चाँदनी रात में खामोशी

जो देखा भूलने से पहले मैं सहमत हूँचाँदनी रात में खामोशी सेमन में सीत्कारती चिंताओँ सेदिल में कुछ ढोती बेचैनी सेकमर में किसी बोझ की अनुभूति सेमुझ से थक चुकी नींद सेमैं सहमत हूँतुम्हारे भय सेदिन के अँधेरे में चलते आर्तनाद से,असहमतियों के साथ बैठेइस स्थिति से सहमत हूँथक चुका हूँ... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[01 Feb 2010 17:26 PM]

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