न समझो कि खुद से जुदा कर रहे हैं
तुम्हारी सफलता कि दुआ कर रहे हैंले आँखों में आंसू विदा कर रहे हैंनिभाया गुरू का फर्ज था जो हमनेन समझो कि खुद से जुदा कर रहे हैंअधूरी तमन्ना कोई रह न पाएयही रात दिन हम सजदा कर रहे हैंखिलाए चमन को तू अपने गुणों सेयही कामना हम सदा कर रहे हैंबुलंदी के आकाश...
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अर्चना तिवारी
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[01 Feb 2010 12:51 PM]



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