विडम्बना
गधों और घोडों केखुरों के बीचरौन्दी जा रही प्रतिभा।नोंच-नोंच उसे खा रहे गिद्धआसमान नाप रहे।सिसकियां भीचाटे जा रहे रात के अन्धेरे मेंचमगादड।खरगोश सा कोमलमुलायम मांस वालाईमान,कब तक कहां-कहां फुदकेगा?आखिर सीधे खडेकान पकड के उसे भून दिया जायेगासरकारी भट्टी...
[पूरी पोस्ट]
अमिताभ श्रीवास्तव
15
2
0
2
14
[01 Feb 2010 14:16 PM]



Shuffle








