ताकि चीते जीते रहें...
कल मेरे एक क्लासमेट और आत्मीय दोस्त शशांक वालिया का अचानक फोन आया। "यार तुम बडे ब्लौग शौग लिखते हो। एक ब्लाग मेरी रिक्वेस्ट पे भी लिखो यार। मैं चाहता हूं कि चीतों पर तुम कुछ लिखो। सेव टाईगर्स का टीवी पर एड देखा तो सोचा कि तुम्हें फोन कर लूं।" बडा अच्छा...
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उमेश पंत
मेरी सोच
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[01 Feb 2010 13:10 PM]



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