उनकी खबर

चिंतन मेरे मन का हर मोड पर दौडती नज़रआये कही से उनकी खबरढूढती रहे उन्हे शहर-शहरकही ना मिली उनकी खबरतुम बिन आसान नही डगरढूढे तुम्हे कहा अब हम मगरनाकामी बस बनी हमसफ़रअपने से ही हुई बात अक्सरहालात पूछते रहे प्रश्न इस कदरटूटती रही आस, वो रहे बे खबर-प्रतिबिम्ब बड्थ्वाल (अबु... [पूरी पोस्ट]
writer प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[01 Feb 2010 11:17 AM]

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