क्रिकेट की मण्डी में कौन आएगा बिकने !

व्यंग्य व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट अब जाकर मेरे सामने सब्ज़ियों-भाजियों का दयनीय पहलू उद्घाटित हुआ है। सब्ज़ी मण्डी की खुली नीलामबोली में दलाल आढ़तियों द्वारा जब कभी भटे-टमाटरों की बोली नहीं लगाई जाती तो उनके नाज़ुक दिलों पर क्या गुजरती होगी, मुझे अब समझ में आया है, जब... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya

Satire

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[01 Feb 2010 10:30 AM]

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