सैयद काशिफ़ रज़ा की कविता
एक मामूली नामवाला आदमीकुछ लोगों के नामयाद रखने के लिए रखे जाते हैंऔर बाक़ी के पुकारने के लिएमोहम्मद अकरम के बाप नेउसका नाम सिर्फ़ पुकारने के लिए रखा थाकुछ लोगों के नामवक़्त के साथ बड़े होने लगते हैंबाकी के और छोटेएक दिन अकरम को भी इक्कू बना दिया गयाउसकी...
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शशिभूषण
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[01 Feb 2010 09:51 AM]



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