खुल गई है फिर पुरानी डायरी
खुल गई है फिर पुरानी डायरीखुल गई है फिर, पुरानी डायरीआ गई फिर याद, भूली शायरीहो गए पीले सभी, पन्ने मगरगंध अब तक भी, सुहानी आए रीफूल सूखे कह रहे, रोते हुएयाद ना दिल से पुरानी, जाए रीक्या कहें मुश्किल, हमें उसके सिवाआज तक दूजा ,कोई ना भाए रीआज भी सुनकर,...
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योगेश स्वप्न
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[01 Feb 2010 09:05 AM]



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