धनुष सरीखा प्लाट
धनुष सरीखे प्लाट में, चले हृदय पर तीर। सब बांधव बैरी बने, आँसू बहाय वीर।। आँसू बहाय वीर, कोई ना पूछे हाल। होय जिगर का खून, रहे रोज आँखें लाल।। कह ‘वाणी’ कविराज, हो तुम भी उस सरीखे। या करलो यह काम, दो प्लाट धनुष सरीखे।। शब्दार्थ: हृदय पर तीर...
[पूरी पोस्ट]
amritwani.com
प्लाट
18
0
0
0
0
[01 Feb 2010 07:00 AM]



Shuffle








