यकीन कर लो

अंतर्द्वंद का आइना यह ग़ज़ल मैंने "तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो" कीतर्ज़ पर लिखा था और पहले भी प्रकाशित कर चूका हूँ.  आज पुन: प्रस्तुत कर रहा हूँ...आशा है पसंद आएगी ... धन्यवाद...तुम जो इतना मुस्कुरा रहे होक्या है कहना जो छुपा रहे हो!नज़रें ये तेरी बता रही हैंनगमे... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha
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[01 Feb 2010 06:50 AM]

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