घिर आये..
घिर आये स्याह बादल सरे शामऔर उदास ये जेहन क्यूँ हुआपोशीदाँ अहसास क्यूँ उभर आयेये दिल तनहा दफ्फअतन क्यूँ हुआयूँ तो अब तक चेहरे की ख़ुशी छुपाते थे ग़म छुपाने का ये जतन क्यूँ हुआ कोई चोट तो गहरी लगी होगी ये संगतराश यूँ बुतशिकन क्यूँ हुआ दुष्यंत.........
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dushyant
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[01 Feb 2010 05:40 AM]



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