लम्हों ने खता की, सदियों ने सजा पाई
छत्तीसगढ़ प्रदेष की यह विडंबना ही है, एक ओर जहां नक्सलियों ने राजधानी की षांत व्यवस्था में कोहराम मचाने का बीड़ा उठाया है, तो दूसरी ओर बाहरी प्रदेषों से आकर राजधानी में लम्बे समय से डेरा डाल रखे लोगों ने यहां के सूने घरों में घुसकर चोरी, लूट, हत्या, अपहरण...
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Gappe bazi
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[01 Feb 2010 06:21 AM]



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