नयी शताब्दी कथेतर गद्य की: प्रो. रामबक्ष
उदयपुर। कल्पनाशीलता का पुराना युग समाप्त हो गया है और अब इसकी आंशिक संभावना गद्य में ही दिखाई दे रही है। तथ्य के प्रति बढ़ रहा आकर्षण बताता है कि पाठक अब ठीक-ठीक जानना चाहता है। यही कारण है कि नयी शताब्दी में कथेतर गद्य विद्याओं को पारम्परिक विधाओं की...
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समकालीन जनमत
साहित्य
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[01 Feb 2010 04:47 AM]



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