प्रार्थना
हे प्रभो ! बड़ा दयालु है तू , तूने युद्धों की दुनिया में बांसुरी बनाई , तूने काँटों की दुनिया में कलियाँ खिलाईं तूने नफ़रतों के अंधेरों में प्यार के दीपक जलाए , तूने मर्दों की दुनिया में औरतें बनाईं !हे प्रभु ! बस इतना वरदान दे - ये वंशियाँ - कोलाहल के...
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पूर्णिमा
कविता
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[28 Jan 2010 08:05 AM]



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