रास्ते

पूर्णिमा चीख पुकार मची है हर ओर.भागी जा रही है दुनिया.धक्का मुक्की में औंधे मुँहगिर पड़ी सब्जी वाली बुढ़िया.पुजारी जी का जनेऊफँस गयापादरी जी के क्रॉस में.मौलवी साहब का पाजामाचिर गयाग्रंथी जी की किरपान से.किसी को परवाह नहीं-न धर्म की न शर्म की.बस दौडे जा रहे हैं... [पूरी पोस्ट]
writer पूर्णिमा

कविता

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[28 Jan 2010 08:03 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix