मन

पूर्णिमा मनअगर फट जाता है कभी,लाख कोशिश करोजोड़े नही जुड़ता.बसतैरती रहती हैं पुरानी यादेंनिचले तल सेऊपरी सतह तक .दूध जैसा मन भीएक बार फटा-तो बस फट गया- सदा के लिए.-पूर्णिमा  शर्मा  ... [पूरी पोस्ट]
writer पूर्णिमा

कविता

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[28 Jan 2010 08:03 AM]

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