आधुनिक भक्ति वेदान्त का शेयर कर्म योग

प्रकाश पाखी अर्जुन उवाच- हे जनार्दन,हे,केशव!जब आप घर बर्बाद करवाने और दिवालिया हो जाने के साधनों में अन्य कई प्रकार के साधनों को भी श्रेष्ठ मानते है,तो फिर मुझे शेयर बाजार में पैसा लगाने के घोर कर्म में क्यों लगाना चाहते है.आपके अनेकार्थक मिले जुले उपदेशों से मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रकाश पाखी
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[01 Feb 2010 04:05 AM]

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