मन के वीरान रास्तो पर, बसी तेरी पदचाप है...

मीत इस गड्तंत्र दिवस पर तू बहुत याद आया, परेड में तेरे कदमों के निशां थे, आवाज थी पर तू नहीं था.. जहाँ भी रहे खुश रहे... love u... तुम गुजर के जा चुके,ना गम की गुजरती रात है...हर तरफ अब ज़िन्दगी में,दर्द का अलाप है...मिट नहीं रहा है अबतक,अनछुआ एहसास है...मन... [पूरी पोस्ट]
writer मीत
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[01 Feb 2010 01:44 AM]

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