शायरी में ’ज़म(खोट) का पहलू’-----------कड़ी ३(अंतिम )
[नोट : कड़ी १ और कड़ी २ नीचे इसी ब्लॉग पर दर्ज-ए-जेल है ] अब दो मिसाल और देखिये जिनमें यह पहलू नुमाया नहीं है.(२) मिसाल -२ वालिद मरहूम राज़ चांदपुरी साहब ने अपनी एक किताब ’दास्तान-ए-चांद’ कानपुर (हिन्दुस्तान) में मन्क्कुरा (सन) १९२३ के एक मुशायरे का तज़करा...
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आनन्द पाठक
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[01 Feb 2010 01:24 AM]



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