बोले तो...आज अपुन का डबल हैप्पी बर्डडे है

अप्रवासी उवाच (Apravasi Uvach) एक लम्बे अंतराल के बाद लिखने बैठा हूँ... आज एक वर्ष पूर्व १ फरवरी के ही दिन से अपनी व्यक्तिगत ३६वीं सूर्य परिक्रमा के प्रारंभ के साथ मैंने चिठ्ठाकारिता की शुरुआत की भी थी. आज जब चिठ्ठा-जगत में लिखते-पढ़ते (लिखते कम, पढ़ते ज्यादा) भूमिरथ पर बैठकर कर... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

स्मृति दर्पण

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[01 Feb 2010 00:00 AM]

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