राजा शयन-कक्ष में आराम हेतु चले गए हैं !
'मेहताना' की आवाज़ मजदूरों ने बुलंद कर दी है ! आपको यहाँ तक ठेल कर लाने वाले - अब , पसीने की कीमत मांग रहे हैं ! आपको ठेल कर गद्दी तक पहुँचाने वाले - आपके चवन्नी और अथ्ठंनी से खुश नहीं हैं - आपके जैसे जिद्दी को ठेलना आसान नहीं था ! आप अकड़ में ही बैठे...
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[31 Jan 2010 23:45 PM]



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