जब लगे रौद सुहानी
देर रात जब बड़े बाज़ार की दूकान बंद हो जाती तब अपने पान बीडी के गुमटी के नीचे गाता था भगत। किर्तनिया था, मंगलवार, एकादशी, और विशिष्ट पर्व वाले दिन दो झंका के गाता था। जितना ही हाथ हारमोनियम पे साधा था उतना ही ढोल पर..साथ के बीडी बांधने वाले ताल से ताल...
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rajkumar jha
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[31 Jan 2010 22:14 PM]



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